लेकिन राधा को पढ़ने की इच्छा अपार थी। उसने अपने छोटे भाई की ग्राम प्रधान जी से मदद की दुआ की। उन्होंने राधा का सपना प्रेरित किया और घर के भांजे के पुस्तक उपलब्ध करवाए। राजा दिन और रात के समय में किताबें पढ़ती, और एक दिन जब कस्बा हाजिर हुआ, उसने सारे लोगों को अपने सपने से प्रेरित बनाया।